संगठन के नियम
श्री राजा भोज राजपूत सेना
संगठन के प्रत्येक सदस्य एवं पदाधिकारी के लिए निम्नलिखित नियम लागू होंगे।
- 1
संगठन के उद्देश्य सर्वोपरि
प्रत्येक सदस्य एवं पदाधिकारी संगठन के उद्देश्यों, सिद्धांतों एवं निर्णयों का सम्मान करेगा तथा उनके अनुसार कार्य करेगा।
- 2
अनुशासन का पालन
संगठन में अनुशासन सर्वोपरि होगा। किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।
- 3
बैठक में उपस्थिति
सभी पदाधिकारियों के लिए संगठन की ऑनलाइन एवं ऑफलाइन बैठकों में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। अनुपस्थित रहने की स्थिति में पूर्व सूचना देना आवश्यक होगा।
- 4
संगठन विस्तार की जिम्मेदारी
प्रत्येक पदाधिकारी अपने क्षेत्र में नए सदस्यों को जोड़ने तथा संगठन का विस्तार करने के लिए जिम्मेदार होगा।
- 5
समाज के इतिहास का प्रचार-प्रसार
सभी सदस्य समाज के गौरवशाली इतिहास, मूल गोत्र, वंश परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करेंगे।
- 6
मूल गोत्र एवं वंश की जानकारी
प्रत्येक सदस्य को अपने मूल गोत्र एवं वंश की जानकारी रखने तथा समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास करना होगा।
- 7
संगठन की छवि का सम्मान
कोई भी सदस्य ऐसा कार्य नहीं करेगा जिससे संगठन की प्रतिष्ठा एवं सम्मान को ठेस पहुंचे।
- 8
संगठन के निर्णय मान्य होंगे
राष्ट्रीय, प्रदेश एवं संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णय सभी सदस्यों एवं पदाधिकारियों पर लागू होंगे।
- 9
गैर समाज के व्यक्तियों की सदस्यता
संगठन की सदस्यता एवं पद केवल समाज के पात्र व्यक्तियों को ही दिए जाएंगे।
- 10
नियम उल्लंघन पर कार्रवाई
जो सदस्य या पदाधिकारी संगठन के नियमों, अनुशासन एवं उद्देश्यों के विरुद्ध कार्य करेगा, उसे जांच उपरांत तत्काल प्रभाव से पदमुक्त अथवा सदस्यता से निष्कासित किया जा सकता है।
संगठन का संकल्प
“अपनी खोई हुई विरासत को पुनः स्थापित करना, अपने मूल गोत्र एवं वंश की पहचान को सुरक्षित रखना तथा प्रत्येक गांव में सम्राट महाराजा भोज की प्रतिमा स्थापित करना।”
आदेशानुसार
राष्ट्रीय कार्यकारिणी
राष्ट्रीय अध्यक्ष व संस्थापक
ठाकुर सा छोटा लाल सिंह जी
